अप्रैल 1946 में रणनीति और योजना समिति की ज्वायंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ की
एक बैठक में अमरीकी विदेश विभाग के एक आला अधिकारी ने कहा था कि "व्यवहारिक तौर वपर सभी सदस्य मानते हैं कि ग्रीनलैंड को खरीदने के पीछे कारण
डेनमार्क होना चाहिए."
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, "इस समिति ने कहा कि देश के पास अब काफ़ी पैसा है. डेनमार्क के लिए ग्रीनलैंड अब फ़ायदे का सौदा नहीं रह गया है और अमरीका की सुरक्षा के लिए ये ज़रूरी है कि इस
इलाके को खुद में शामिल कर लिया जाए."
बराक ओबामा प्रशासन के दौरान डेनमार्क के लिए अमरीकी राजदूत रह चुके रूफ़स गिफ़ोर्ड उस वक्त के देश के हालात के बारे में बताते हैं.
एनपीआर
को दिए अपने साक्षात्कार में उहोंने कहा, "1946 में हमारे लिए ये देखना महत्वपूर्ण था कि राजनीतिक और भौगौलिक तौर पर हमारी स्थिति क्या थी. ये दूसरे विश्व युद्ध के बाद और शीत युद्ध शुरु होने के पहले का दौर था. यूरोप
में जारी राजनीतिक अस्थिरता को ले कर अमरीका काफ़ी चिंतित था."
"इस
तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं की दुश्मन ग्रीनलैंड के रास्ते अमरीका के नज़दीक पहुंच सकते हैं. ऐसे में ग्रीनलैंड ख़तरनाक बन गया था."
गिफॉर्ड
मानते हैं कि मौजूदा हालात अलग हैं. वो कहते हैं आज के वक्त में ग्रीनलैंड के साथ अमरीका के बेहतर और मज़बूत रक्षा और आर्थिक संबंध हैं.
वो मानते हैं कि ऐसा नहीं लगता कि अब अमरीका के लिए ग्रीनलैंड को ख़रीदना ज़रूरी रह गया है.
1940 के दशक के अंत में ट्रूमैन के प्रस्ताव को लेकर डेनमार्क की
प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं थी. लेकिन साल 1950 तक अमरीका इस तरह के आदेश
हासिल करने में कामयाब रहा जिसके तहत वो ग्रीनलैंड में अपना एक सैन्य अड्डा बना सकता था. ये शीत युद्ध की शुरुआत से ठीक पहले की बात थी.
अमरीका
के समुद्रतट से काफ़ी दूर स्थित उत्तर में मौजूद अमरीकी सेना का टूली हवाई
अड्डा, इस बात की गवाही देता है कि अमरीका के लिए ग्रीनलैंड आज भी बेहद
अहम है.
सच कहें तो चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के बीच अमरीका में कई लोग ट्रंप के इस बयान का समर्थन करते हैं कि ग्रीनलैंड को अमरीका के
कब्ज़े में लाया जाना चाहिए.
आर्कटिक सर्कल से बीजिंग की दूरी 3,000 किमी. (1,800 मील) है लेकिन चीन वहां निवेश के नए आयाम ढूंढ़ रहा है.
आर्कटिक की बर्फ़ से सामान की आवाजाही के रास्ते बनाने के लिए कई आइसब्रेकर्स (बर्फ़ पर चलने वाले जहाज़) चीन ने ख़रीद लिए हैं या वहां भेज दिए हैं. इनमें परमाणु शक्ति से चलने वाले आइसब्रेकर्स भी शामिल हैं.
इस काम को अंजाम देने के लिए चीन की नज़र ग्रीनलैंड पर है. यहां चीन अपने पोलर सिल्क रोड पर स्टेशन बनाने की संभावनाएं ढूंढ़ रहा है.
रिपब्लिकन पार्टी के नेता माइक गैलाघर ने ट्वीट किया, "ये एक स्मार्ट फ़ैसला है. ग्रीनलैंड अमरीका के लिए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है और
बेहिचक इस पर विचार किया जाना चाहिए."
माना पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन की ये कोशिश नाकाम रही थी. लेकिन दो देशों के बीच इस तरह का सौदा पहले भी क़ामयाब रहा है.
1917 में अमरीका ने डेनमार्क के कब्ज़े में रहे वेस्ट इंडीज़ को अमरीका ने एक सौदे के तहत ख़रीदा था. इन द्वीपों को नामकरण अमरीका के वर्जिन द्वीप के तौर पर किया गया.
गिफोर्ड
कहते हैं, उस वक्त अमरीका को अच्छी क़ीमत पर ये द्वीप मिला था. एनपीआर को
दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि "डेनमार्क के लोग अभी भी इस झटके से
उबर रहे हैं."
"इससे मुझे ये तो पता चलता है कि दोबारा ऐसा कुछ नहीं होगा. वो फिर से इतिहास नहीं दोहरांगे."