Wednesday, September 19, 2018

拉中环境议题会商机制亟待完善

中国清楚地知道自己在中拉关系中的利益诉求,但拉美是否清楚自己希望从与中国的合作中得到些什么?

11月8日在智利圣地亚哥举行的中国—拉美多学科聚焦网络( )第二次国际会议上,专家们表示,该地区必须拿出清晰的对华合作战略。

但是,拉丁美洲的政治分化将使这一目的难以实现。厄瓜多尔高等教育部副部长阿德里安•博尼拉表示:“该地区有一半的国内生产总值来自厄瓜多尔、玻利维亚和委内瑞拉这种受保护的经济体,另外一半则来自智利和秘鲁等开放的市场经济体。

该地区与中国不断增长的贸易是建立在原材料出口和高科技产品和工业制成品进口的基础上的。中国的投资也主要集中在为促进上述贸易的能源和交通基础设施领域,但这些投资却带来了社会、环境和经济风险。

2016年,中国外交部发布白皮书,阐述了与拉美的长期合作计划。对此,只有智利一国正式做出回应。白皮书指出,中国-拉美和加勒比国家共同体( )论坛是合作和参与该地区事务的主要平台。

当中拉对话的记者问到中国—拉共体论坛是否是一个可以就改进中拉关系进行紧急讨论的单向对话机制时,博尼拉表示:“论坛不是单向的对话,它共由33个对话机制组成,”他还补充说,论坛无法处理拉美国家寻求与中国经济互补方面的多种需求,各国应着力改善其与中国的双边关系。

博尼拉证实,像对待欧洲和美国一样,中国也制定了对拉战略。但是,对于即将于明年一月份在智利首都举行第二届中拉论坛部长级会议的拉共体来说,不仅没有针对上述任何一个地区制定相应的战略,甚至连机构职能都不完备(连电话号码或网站都没有)。

环境对话迫在眉睫

如果中国—拉共体论坛无法实现有意义的环境对话,那么中国和拉美能通过怎样的机制展开有效的环境问题讨论呢?

今年年底前,中国将把二十国集团( )轮值主席国的位置移交给阿根廷。二十国集团在上届杭州峰会上做出了推进环境议程的重大承诺。

那么,2018年在布宜诺斯艾利斯举行的会议中会有怎样值得期待的成果呢?

根据阿根廷布宜诺斯艾利斯国家与社会研究中心的经济学家莱昂纳多·斯坦利的说法,二十国集团中美国支持化石能源将使各国实现绿色承诺的难度加大,其中包括取消化石能源补贴的问题。他说:“机会虽然存在,但保持现状停步不前的几率也很高。

斯坦利指出,阿根廷已着手通过提高价格上限来解决化石能源补贴的问题。但是这种做法把所有的重心都放在了消费者需求上,“在供给侧,政府仍有发展(页岩油气田)瓦卡穆尔塔的政策。”

阿根廷亦大力推动可再生能源的投资。斯坦利说,荒唐的是,该领域的投资却没有享受到政府补贴。

民间组织的活动空间

在中国和拉美国家,民间组织一直是要求地方和国家提高环保标准的关键力量。

西班牙萨拉曼卡大学的研究员鲁本·冈萨雷斯认为,由于可供国际环境组织运作的空间往往是有限的,因此,确保多边论坛听取他们意见的难度很大。

“在矿产冲突的问题上,拉丁美洲的民间组织有时可以依靠国际非政府组织的支持,而这种联合对于中国来说却不太适用,”中—拉多学科聚焦网络第二次国际会议环境专题小组成员冈萨雷斯表示。

根据汉堡大学研究员希梅娜·萨帕塔的说法,她的祖国厄瓜多尔政府的做法并未缓解现状。他们发放特许开采权的做法不当,对外宣称支持新的生态环保理念,实际上却追求一种“采掘主义”的发展模式。

比如,该国政府曾向中资的科里安特公司( )发放了开采许可证,而该许可证标的所在地属于一块名义上的保护区。

中拉对话近期的一份调查也将人们的注意力引向了厄瓜多尔与中国公司之间交易的不透明。

双向学习

中国社会科学院拉美问题研究专家吴国平说,为满足中国日益增长的需求,包括智利在内的一些国家也在通过水果出口获益。这些国家正在适应新的发展常态,不断提升双方关系的活力。

但是,不仅仅是拉美国家有很多要学的东西。吴国平问道,比如,与不熟悉中方雇佣政策的拉美工会打交道,中国公司是否已经准备好了呢?

然而,吴国平也表达了他在这个问题上乐观的态度。中国在拉丁美洲正推行一种新的公私伙伴关系( )模式。这可能会使当地的合作伙伴获利,并有利于推进招标进程。

“他们必须了解和充分利用劳动力市场,虽然仍有许多工作要做,但是他们正在学习。”

Thursday, September 13, 2018

印度村庄在运河破裂后被淹没

联合国最新发表的一份有关非洲的卫星地图集显示,城市化进程加快和气候变化,导致非洲滥伐森林的速度是世界平均值的两倍,非洲的冰川快速消融,以及其它毁灭性影响。
非洲的森林面积正在以每年4百多万公顷的速度消失——这是引起非洲35个国家忧虑的根源所在,包括民主刚果( )、马拉维、尼日利亚和卢旺达。坦桑尼亚乞力马扎罗山的积雪和乍得湖的湖水正在消失,这已是众所周知。卫星图像还显示,位于民主刚果( )和乌干达边境的鲁文佐里山上的冰川也已经缩减过半。

这份400页的卫星地图集周二在非洲环境部长会议上面世。与会的联合国环境规划署( )执行主任阿齐姆•施泰纳称,气候变化是“很多这类问题背后的推手”。

  地图集是为在约翰内斯堡召开的这次环境部长会议准备的,它也显示出在某些地区的积极迹象。然而施泰纳指出,地图集“清楚地表明,在超越人类控制的某些领域,人类是如此脆弱”。他说,此次调查所见“凸现了” 年哥本哈根联合国气候变化会议达成新气候协议的急迫性。界银行负责拉美事务的副行长帕莫拉•考克斯周二对路透社说,巨额主权财富基金可在开发替代技术,应对气候变化方面发挥“极大的作用”。 仅中国政府控制的投资基金就达3千亿美元,而全球投入到主权财富基金的资本总额高达3万亿美元。

由于新兴经济体政府近来使用这些新生财富在世界各地并购资产,主权财富基金已经引发了发达国家贸易保护论者的忧虑。考克斯说,应该将这些新兴财富中的一部分引到某个全球基金,以应对气候变化。

目前,石油输出国组织( )正在规划成立一个7亿5千万美元的基金会,以便开展温室气体地下深埋技术的研究。阿联酋也承诺提供150亿美元用于可持续能源研究。发达国家正在设立一个100亿美元的气候投资基金( ),将由世界银行进行管理,旨在资助低碳技术研究。
印度纳尔默达运河干渠上出现6米宽的裂口导致了印度西北部城市拉贾斯坦邦有超过200间的房屋被水淹没。纳尔默达河是世界上最大的灌溉运河。
当水从该运河干渠中涌出后,印度村庄 完全地被水淹没。20年来对在这条河上建造大坝工程的持续反对活动被国际河流组织人员称为世界上最大的社会运动之一。

据《印度快报》报道,当地一名官员说:"起初,只有一个裂缝。但是,早上9点(周三)时它就扩大成一个主要的裂口,接着水就开始涌进附近的村庄。"

环保分 说,这是该运河上第三次主要的破裂事件。他指控印度政府不负责任的行为以及不善的质量检测程序。同时,他说,非政府组织专家,公民社会和媒体代表应参与到运河的调查工作中。

Monday, September 3, 2018

कर्नाटक: पुलिस जवान मोटापा कम करें नहीं तो जाएगी नौकरी

कर्नाटक पुलिस ने अपने 14 हज़ार जवानों को तीन महीने का वक्त दिया है. इस तीन महीने में उन्हें अपना मोटापा कम करना होगा.
अगर वो तय समय सीमा में फ़िट नहीं होते हैं तो उन्हें नौकरी से बर्ख़ास्त भी किया जा सकता है.
कर्नाटक स्टेट रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) ने अपने प्लाटून कमांडर को ऐसे पुलिस कर्मियों की पहचान करने को कहा है जिनके वजन ज्यादा और पेट निकले हुए हैं.
केएसआरपी के अतिरिक्त महानिदेशक भास्कर राव ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "छह महीने पहले जवानों की शारीरिक जांच की गई थी, जिसमें उन्हें मधुमेह और वजन की समस्या से होने वाली बीमारी का पता चला है. अगर वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं और फिट नहीं होते हैं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा."
देश में ऐसे पुलिसकर्मी आसानी से कहीं भी दिख जाएंगे. पिछले दो दशकों में विभाग के कराए गए कुछ सर्वे में भी यह बात समाने आई है कि वे स्वस्थ नहीं है. पुलिसकर्मी, ख़ासकर ट्रैफ़िक व्यवस्था में लगे कर्मी को फेफड़े और दिल की बीमारी होती है.
लेकिन भास्कर राव ने जवानों को फ़िट रहने के लिए यूं ही नहीं कहा है. वो इसके पीछे बड़ी वजह बताते हैं.
वो कहते हैं, "पिछले 18 महीनों में, हमारे 153 कर्मियों की मौत हो गई. उनमें से 24 की मौत सड़क दुर्घटना में और नौ ने आत्महत्या कर ली. बाकी की मौतें मधुमेह, दिल की बीमारी और अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों की वजह से हुईं. यह सावधान करने वाली स्थिति है."
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और दूसरी ज़रूरतों में क़ानून व्यवस्था को संभाल रहे रिजर्व पुलिस के जवानों को अधिकतर खाने में चावल के पकवान दिए जाते हैं.
भास्कर राव कहते हैं, "वे लोग चावल के पकवान खाते हैं, फिर सिगरेट पीते हैं और बाद में शराब भी. खेल-कूद जैसे शारीरिक परिश्रम की कमी के चलते वे मोटे हो रहे हैं और उनकी वर्दी छोटी हो रही है. इसलिए प्लाटून कमांडर को उन्हें फ़िट बनाने को कहा गया है."
एक प्लाटून कमांडर के अंदर रिजर्व पुलिस के 25 जवान होते हैं. उन्हें हर हफ्ते जवानों का वजन करने को कहा गया है.
जवानों को फिट रखने के लिए केएआरपी ने स्वीमिंग और योग क्लास की शुरुआत की है. उन्हें विभिन्न खेल-कूद में भाग लेने को भी कहा जा रहा है.
ये सबकुछ उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर करने को कहा गया है.
भास्कर राव कहते हैं, "हमारी यही योजना है. अगर वे स्वास्थ्य रहेंगे, उनका जीवन अच्छा होगा. वो लंबा जिएंगे. हम चाहते हैं कि वो जब अपने परिवार लौटे तो स्वस्थ रहें. हमारी योजना है कि वो 60 साल की उम्र में तीन जवान लोगों को अकेले संभाल सके."
अगली बार जब आप किसी रेस्टोरेंट में जाएं और वहां मछली या कोई और सी-फ़ूड ऑर्डर करें तो इस तस्वीर को ज़हन में रखें. इस तस्वीर को अगर ज़ूम करके देखेंगे तो बहुत से नीले बिंदु नज़र आएंगे. ये नीले बिंदु दुनिया भर में हज़ारों जहाज़ों से की जाने वाली कमर्शियल फ़िशिंग को दर्शाते हैं.
हमारी धरती के दो तिहाई हिस्से पर समंदर फैले हुए हैं और दुनिया के क़रीब 55 फ़ीसद समुद्री इलाक़े में कारोबार के लिए मछली पकड़ने का काम हो रहा है. ये दुनिया भर में खेती की जाने वाली ज़मीन का चार गुना है.
वैसे तो मछली पकड़ने के लिए अक्सर लोग फ़िशिंग क़ानून का पालन करते हैं. लेकिन कुछ उसका उल्लंघन भी करते हैं. इस से व्यापार और समुद्र दोनों को नुक़सान पहुंचता है.
ऐसे लोग ज़रूरत से ज़्यादा मछली समुद्र से निकाल लेते हैं इससे समुद्र में मछलियों का संतुलन बिगड़ता है, और मछली पालन को भी नुकसान पहुंचता है.
बहुत से देश मछली पकड़ने के क़ायदे क़ानून मज़बूती से लागू नहीं करा पाते. इसी वजह से ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से मछली पकड़ने का कारोबार लाखों डॉलर तक पहुंच चुका है.
क़ानूनी और ग़ैर-क़ानूनी दोनों तरीक़ों से हर साल लगभग 23 अरब डॉलर की मछलियां समंदर से पकड़ी जाती है. विश्व खाद्य संगठन के आकलन के मुताबिक़ समुद्र में मछलियों की तादाद कम होने से विश्व भर में लाखों लोगों की नौकरी और खाने का संकट पैदा हो सकता है.
मसला ये है कि ग़ैर कानूनी तरीक़े से मछली पकड़ने का काम छिप कर होता है. समुद्र में लाखों जहाज़ मछली पकड़ते हैं. ऐसे में वैध तरीक़े से कौन मछली पकड़ रहा है और कौन ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से, इसका पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है.
इस पर रोक लगाने के लिए ही 2016 में स्काई ट्रूथ और गूगल की मदद से ग्लोबल फ़िशिंग वॉच तैयार की गई है जो सैटेलाइट डेटा की मदद से पर्यावरण संरक्षण का काम करती है. ये एक मैपिंग प्लेटफॉर्म है. इस मैप के ज़रिए दुनिया भर में चल रही कमर्शियल फ़िशिंग का पता लगया जा सकता है.
समुद्र के संरक्षण के लिए काम कर रही संस्था ओशियाना समुद्र में चल रही ग़ैर क़ानूनी गतिविधयों पर नज़र रखने के लिए इस डेटा का इस्तेमाल कर रही है.
बहुत से बड़े-बड़े जहाज़ों में ऑटोमेटिक आईडेंटिफ़िकेशन सिस्टम यानी AIS लगा होता है. सैटेलाइट के ज़रिए इन जहाज़ों की स्थिति पता चलती रहती है और छोटे जहाज़ इनसे टकराने से बच जाते हैं.
इस डेटा के इस्तेमाल से क़रीब 70 हज़ार जहाज़ों को देखा जा सकता है. AIS की वजह से ग्लोबल फ़िशिंग वॉच आंकडों के ज़रिए ये पता लगा लेती है कि कौन सा जहाज़ किस समय मछली पकड़ रहा है.
नक़्शे में नज़र आ रहे लाल रंग वाले इलाक़े को नो-टेक कहा जाता है. ये समुद्र का संरक्षित क्षेत्र है, जहां कमर्शियल फ़िशिंग की इजाज़त नहीं है. नक़्शे में नज़र आ रहे लाल रंग वाले बड़े वर्ग वर्ल्ड हेरिटेज साइट संरक्षित फ़ीनिक्स द्वीप को दर्शाते हैं. ये द्वीप किर्बाती राष्ट्र का है. इस इलाक़े में किरीबाती के समुद्री क़ानून चलते हैं. एक जनवरी 2015 से यहां मछली पकड़ना ग़ैर क़ानूनी है.
लेकिन, पाबंदी के छह महीने बाद ही ग्लोबल फ़िशिंग वॉच से पता चला कि संरक्षित इलाक़े में ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से मछली पकड़ी जा रही है. इस तकनीक की मदद से ही किरीबाती जैसे छोटे से देश ने ग़ैरक़ानूनी फ़िशिंग करने वाली कंपनी पर बीस लाख डॉलर का जुर्माना लगाया. किरीबाती जैसे छोटे देश के लिए ये रक़म बहुत बड़ी थी. ये रक़म इस देश की कुल जीडीपी का एक फ़ीसद थी.
ग्लोबल फ़िशिंग वॉच जहाज़ों पर लगी AIS की बत्ती के ज़रिए उन्हें पहचानती है. सवाल उठता है कि अगर जुर्माना इतना भारी है, तो, ये जहाज़ AIS की बत्तियां बुझा क्यों नहीं देते. अगर जहाज़ बत्तियां बुझा देंगे तो वो अपने लिए ही ख़तरा मोल ले लेंगे. ऐसा करने से रात में दूसरे जहाज़ों से टकराने की संभावना काफ़ी बढ़ जाएगी.
अगर कोई जहाज़ ऐसा करता है, तो ज़ाहिर हो जाएगा कि वो किसी अवैध काम में लगा हुआ है. मसलन, हो सकता है वो किसी ऐसे देश की सरहद में दाखिल हो रहा है, जहां उसे जाने की इजाज़त नहीं है. या हो सकता है कि वो प्रतिबंधित इलाक़े में मछली पकड़ रहे हों. ग्लोबल फ़िशिंग वॉच ने ऐसी हरकतें भी अपने कैमरे में क़ैद की हैं. लोबल फ़िशिंग वॉच के ज़रिए ट्रांसशिपिंग पर भी नज़र रखी जाती है. ट्रांसशिपिंग के समय जहाज़ पकड़ी गई मछलियां कार्गो वाले जहाज़ पर शिफ़्ट करते हैं. वो यहीं तेल भी भरवाते हैं. ट्रांसशिपिंग के तहत जहाज़ समुद्र में कई महीने तक खड़े रह सकते हैं. ये पूरी तरह से क़ानूनी है.
लेकिन, कई जगह इसकी भी इजाज़त नहीं है. दरअसल इस दौरान दीगर ग़ैर कानूनी गतिविधियां होने लगती है. जैसे मानव तस्करी का ख़तरा बढ़ जाता है. या हो सकता है अगर कोई कर्मचारी जाना चाहता है, उसे यहां बंदी बना कर रखा जा सकता है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़िशिंग इंडस्ट्री में कम उम्र बच्चों को तस्करी के ज़रिए लाकर काम पर लगाया जाता है. क़रीब 40 फ़ीसद कर्मचारी 18 से कम उम्र के होते हैं. यहां मारपीट भी ख़ूब होती है.
समुद्र से मछली पकड़ने के काम में पारदर्शिता लाने के लिए सरकारें अहम रोल निभा सकती हैं. इसके लिए उन्हें वेज़ल मॉनिटरिंग सिस्टम डेटा को सार्वजनिक करना होगा.
इंडोनेशिया इस दिशा में पहल कर चुका है. समुद्र में मछलियों का संतुलन बनाए रखने और ग़ैर कानूनी फ़िशिंग पर लगाम कसने के लिए अन्य देशों से भी ऐसे ही सहयोग की उम्मीद है.